रंग बदलता शिवलिंग – किन्नर कैलाश

भारत में एक से बढ़कर एक तीर्थस्थान है, उनमे से एक है किन्नर कैलाश शिवलिंग। हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में तिब्बत सीमा के पास लगभग 6050 मीटर ऊँचा एक पर्वत है। जो हिन्दू धर्म मानने वालो में बड़ी आस्था रखता है। इसी पर्वत पर स्थित है प्राकृतिक शिवलिंग किन्नर कैलाश। किन्नर कैलाश को हिमाचल का बदरीनाथ भी कहा जाता है। इसे रॉक केसल के नाम से भी जाना जाता है। पुरातन सामग्रियों के अनुसार किन्नौर के निवासियों को किन्नर कहा जाता है। किन्नर का अर्थ- आधा किन्नर और आधा ईश्वर।

शिवलिंग रंग बदलता है

ये दुनिया का एकमात्र शिवलिंग है जिसका रंग बदलता है। इस शिवलिंग की विशेषता है इसका रंग बदलना। सूर्योदय से पूरब सफ़ेद, सूर्योदय होने पर पीला, मध्याह्न काल में लाल हो जाता है। और फिर क्रमशः पीला, सफ़ेद होते हुए शाम को काला हो जाता है। कुछ बुद्धिजीवी इसे वैज्ञानिक मानते है। उनके अनुसार यह पर्वत स्फिट का बना हुआ है। सूर्य की किरणों से यह रंग बदलता है।

यहाँ की यात्रा 1993 में शुरू हुई

यह स्थान 1993 से पहले आम जनता के लिए प्रतिबंधित था। पर 1993 के बाद से इसे पर्यटन के लिए खोल दिया। यह स्थान 24000 फ़ीट पर है। यहाँ 40 शिवलिंग हिन्दू और बौद्ध धर्म दोनों के लिए पूजनीय है। यहाँ पर भारी संख्या में श्रद्धालु आते है और परिक्रमा लगते है।
यहाँ की परिक्रमा करना बेहद ही कठिन कार्य है। बहुत से भक्त अपने आपको रस्सी से बांधकर परिक्रमा करते है। ये परिक्रमा लगभग एक सप्ताह से दस दिन में पूरी होती है। पारंपरिक रूप से ज्यादातर भक्त यहाँ सावन के महीने में परिक्रमा करते है। यात्रा आरम्भ होने पर यहाँ तीर्थयात्रियों के लिए सुविधाएं प्रदान की जाती है। इनमें से कुछ सुविधाएं निःशुल्क होती है, तो कुछ के लिए शुल्क देना पड़ता है। ये सुविधा सरकार और निजी संस्थाओ द्वारा होती है।

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